गोचर क्या है ? (What is Transit ?)
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- On March 8, 2020
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गोचर क्या है ? (What is Transit?)
गोचर क्या है ? What is Transit? वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) में 12 राशियों में ग्रह(Grah) का किसी एक राशि(Rashi) से दूसरी राशि(Rashi) में प्रवेश करने की क्रिया को गोचर(Transit) कहते हैं। राशि(Rashi) चक्र में बारह राशियाँ होती हैं और इन सभी राशियों का अलग-अलग स्वभाव होता है। गोचर(Transit) दो शब्दों के योग से बना है जिसमें पहला शब्द ‘गो’ है और दूसरा ‘चर’ है। ‘गो’ का अर्थ ग्रह (तारा) या नक्षत्र से है जबकि ‘चर’ का मतलब गमन करने (चलने) से है। ग्रह(Grah) तथा नक्षत्रों का प्रभाव सीधे मनुष्य के जीवन पर पड़ता है। किसी जातक की जन्म कुंडली(Kundli) के आधार पर विभिन्न ग्रहों के गोचरों के प्रभावों को जाना जाता है। इसे गोचर(Transit) कुंडली(Kundli) फलादेश भी कहते हैं।
गोचर(Transit) फलादेश चंद्र लग्न से किया जाता है, इसलिए सबसे पहले ये जान लेते हैं कि प्रत्येक गृह अपने गोचर में किन स्थानों पर शुभ फल देने वाले होते हैं। इसको नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है।
सूर्य : ३,६,१०,११ , चन्द्रमा : १,३,६,७,१०,११ , मंगल : ३,६,११ , बुध : २,४,६,८,२०,११, बृहस्पति : २,५,७,९,११ , शुक्र : १,२,३,४,५,८,९,११,१२ , शनि : ३,६,११ , राहु : ३,६,१०,११, केतु : ३,६,१०,११
संक्षेप में ये भी जान लेते हैं कि प्रत्येक ग्रह का गोचर(Transit) जन्मकालीन चंद्र राशि से प्रत्येक घर में क्या परिणाम दे सकता है। इसको एक उदहारण से समझ सकते हैं : मान लो किसी की कुंडली में जन्मकालीन चन्द्रमा कर्क राशि में है और हमें शुक्र ग्रह का गोचर(Transit) फल जानना है तो जब शुक्र ग्रह गोचरवश कर्क राशि में आएगा तो शुक्र को पहले स्थान में कहा जायेगा अगर शुक्र सिंह में हो तो दूसरे स्थान में कहा जायेगा। इसी तरह सभी ग्रहों को समझना चाहिए। बहुत ही संक्षिप्त फलादेश सूक्ष्म जानकारी के रूप में नीचे दिया जा रहा है।
सूर्य गोचर(Transit): १- अहंकार ,क्रोध, परिश्रम ,व्यर्थ के खर्चे २-जिद्दी हो जाये ,धन का हरण या नाश ,कुटुंब से वाद विवाद ३-शुभ समाचार, उन्नति , कार्य में सफलता ४- सुख में कमी, कोई रोग हो जाये ,माता को कष्ट ५-मानसिक चिंता ,संतान से कष्ट , ६- शत्रुओं का नाश, रोगों का नाश ७-पार्टनर से विवाद,यौन रोग ,गुदा रोग ८-भय बना रहे, गुप्त संबंधों से परेशानी,कलह , नुक्सान , सरकार से भय ९-कार्यों में असफलता,कार्यों में रूकावट १०-सफलता मिले, उन्नति हो , सरकार से फायदा मिले ११-तरक्की मिले,आय के साधन बने या बढ़ोतरी हो,सम्मान मिले १२- दुःख क्लेश मिले, व्यर्थ दुश्मनी बढे धन का व्यय हो
चन्द्रमा गोचर(Transit) १- ख़ुशी मिले,भाग्योदय हो २-आर्थिक परेशानी,कुटुंब में विरोध ३-विजय मिले ,भाई बहनों से ख़ुशी मिले ४-दुःख हो,माँ से परेशानी या कष्ट ५-संतान से कष्ट ६- रोग और दुश्मन नष्ट हो जाये ७-पत्नी का सहयोग,पार्टनर से सुख ८-हानि ,अपमान 9-रोग आदि से कष्ट १०-कार्य में सफलता ११-ख़ुशी मिले,आय बढे १२-व्यय ,हानि
मंगल गोचर(Transit): चिंता हो,ज्वर या गर्मी के रोग या रक्त सम्बन्धी रोग, उग्रता बढे २-वाणी में कठोरता,हानि,झगड़ा ३-विजय, ख़ुशी ४-रोग,नौकरी में रूकावट५-संतान कष्ट,लोगों से बैर,पेट सम्बन्धी विकार ६-शत्रुओं पर विजय,रोग नष्ट हो,कार्यों में सफलता ७-पत्नी से कलह, साझेदारी में नुक्सान ८-अपमान , हानि ,एक्सीडेंट १०-कार्यों में असफलता ११-भूमि सम्बन्धी कामों से लाभ,आमदनी के स्रोत बढ़ें १२-धन नाश,उद्वेग,चिंता
बुध गोचर(Transit): १-हानि , व्यक्तित्व में गिरावट २-धन लाभ , अच्छी वाणी,शुभ समाचार ३-भय ४-धन संपत्ति बढे ५-संतान से विरोध शिक्षा में रूकावट ६- विजय ७-पत्नी से झगड़ा साझेदार से झगड़ा ८-धन लाभ, कुटुंब में ख़ुशी ९-बाधाएं खड़ी हों १०-खुशियां मिलें तरक्की हो ११-आर्थिक लाभ १२-व्यक्तित्व में दीनता , हानि
बृहस्पति गोचर(Transit): १-शत्रुता बढे,अहंकार बढे ,हानि हो २-वाणी से धन प्राप्ति , कुटुंब में ख़ुशी , धन लाभ ३-स्थान परिवर्तन हो, समाज में अपमान का भय हो, अपने ही लोगों से विरोध हो ४- भूमि,वाहन से नुक्सान ,हानि ५-संतान से सुख ,राज्य से सम्मान ६-शत्रुओं से कष्ट, रोग ७-पत्नी से सुख सहयोग,अच्छी यात्रा ८-धन नाश, कष्ट, भय ,चिंता ९-भाग्योदय हो १०-नौकरी में रूकावट या सामान को धक्का ११-मान सम्मान मिले, आय के साधन मिलें १२- व्यर्थ की यात्रा,भय ,चिंता उद्वेग, हानि
शुक्र गोचर(Transit): १-व्यक्तित्व में निखार ,भोग २-धनलाभ, वाणी से लाभ ३-लोगों से संपर्क बढे,लाभ हो ४-सुख मिले,मित्रों से फायदा हो ५-संतान सुख, ख़ुशी मिले ६-कष्ट हो, रोग ७-स्त्री के कारण कष्ट ८-सुख संपत्ति ९-सौभाग्य ,यात्रा हो १०-नौकरी में क्लेश ११-लाभ १२-शयन सुख ,धन लाभ
शनि गोचर(Transit): १- दुःख मिले २-धन का व्यय ,परिवार में कष्ट ३-नौकरी में लाभ,प्रमोशन ४- स्त्री को कष्ट ,भाई बंधुओं से विरोध ५-मानसिक चिंता,संतान कष्ट ६-शत्रुओं का विनाश,रोग समाप्त ७-स्त्री से कलह ,व्यर्थ की यात्रा ८-धन,मित्र,सम्बन्धी सबसे कष्ट ९-धन नाश,दर्द्र्ता,किसी गुरुजन की मृत्यु धर्म में अरुचि १०-अपमान का भय , नौकरी में कष्ट ११-शुभ कार्य,आय के साधन बनें १२-व्यर्थ का परिश्रम ,लोगों से विरोध ,हानि
राहु गोचर(Transit):१-रोग,शरीर का व्यय २-धन हानि,३-सुख मिले ४-दुःख शिक्षा में रूकावट ,बुजुर्गों को मृत्यु तुल्य कष्ट ,धन हानि,संतान को कष्ट, ६-रोग निवृत्ति ,शत्रुओं पर विजय, ७-पारिवारिक जीवन में क्लेश ८-मृत्यु तुल्य कष्ट ९-अधार्मिक कार्यों में प्रवृत्ति १० हुकूमत से लाभ ११-सौभाग्य १२-व्यर्थ व्यय


