बृहस्पति पहले घर में (Jupiter In First House)

बृहस्पति पहले घर में (Jupiter In First House)

हमारा विषय है : वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) में अगर बृहस्पति पहले घर में(Jupiter in First House) बैठा हो तो उसके क्या परिणाम हो सकते हैं।अपने सब्जेक्ट पर आगे बढ़ने से पहले कुछ बातें पहले घर और बृहस्पति ग्रह से सम्बंधित जान लेना जरुरी है। वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली में पहले घर से व्यक्तित्व ,रूप, सिर, चेहरा, वर्तमान , कुटुंब का व्यय , भाई बहनों की आय, माता के कर्म, बच्चों का भाग्य , मामा की मृत्यु , नौकरी में प्रमोशन या डिमोशन आदि का विचार किया जाता है | पहले घर को जन्म लग्न भी कहा जाता है। वहीं गुरु बृहस्पति को सेनापति भी कहा जाता है ,ये एक राशि में लगभग 13 महीने रहता है | ज्योतिष, पति सुख, खजाना, धर्मशास्त्र, धन, ज्ञान ,आचार्य, अच्छा आचरण, यज्ञ,बड़ा भाई, राज्य से मान सम्मान,तपस्या, आध्यात्मिकता, श्रद्धा और विद्या इत्यादि का विचार भी बृहस्पति से किया जाता है | ये धनु और मीन राशियों का स्वामी होता है। बृहस्पति को कर्क राशि में उच्च तथा मकर राशि में नीच माना गया है |

कुंडली(Kundli) के पहले घर में बृहस्पति(Jupiter in First House) बलवान होकर बैठा हो तो व्यक्ति को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित कर सकता है। अक्सर देखने में आया है कि ऐसे व्यक्ति धन के पीछे नहीं भागते बल्कि उनका मानना है कि असली धन तो विद्या है ,शिक्षा है। हालाँकि धन संपत्ति के मालिक भी होते हैं। अगर दूसरे ग्रहों का साथ मिल रहा हो तो ऐसे लोग बहुत ही सैद्धांतिक हो सकते हैं। अपने संस्कारों और संस्कृति के लिए कुछ भी कर सकते हैं। अमूमन ऐसे लोग शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े होते हैं लेकिन अपनी प्रभावशाली वाणी और व्यक्तित्व के बल पर वकालत, प्रीचर या कोई भी ऐसे पेशा जिसमे बोलने का अधिकार मायने रखता हो उसमे सफलता पा सकते हैं। अक्सर ऐसे लोग घर के मुखिया हो सकते हैं या भाई बहनों में सबसे बड़े हो सकते हैं। सातवें घर पर दृष्टि के चलते ऐसे लोगों को अच्छा जीवनसाथी मिल सकता है। ऐसे लोग किसी धार्मिक संगठन से भी जुड़े हो सकते हैं और देश विदेश में लम्बी यात्राएं कर सकते हैं। ज्ञान के प्रचार प्रसार के लिए विदेश जा सकते हैं। ज्ञान के प्रसार में आधुनिक शिक्षा भी शामिल है। दूसरे ग्रहों का साथ मिल रहा हो तो ऐसे लोग राजनीति के क्षेत्र में भी सफलता पा सकते हैं।

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) में अगर बलवान बृहस्पति पहले घर में(Jupiter in First House) बैठा हो तो ऐसे व्यक्ति उच्च पद प्राप्त कर सकते हैं , सेना में उच्च पदों को सुशोभित कर सकते हैं। मंगल ग्रह सैनिक है लेकिन बृहस्पति सेनापति है। अक्सर अनुभव में आया है कि पहले घर के बृहस्पति के परिणाम व्यक्ति की नीयत पर निर्भर करते हैं। अगर ऐसे व्यक्ति की नीयत ज्ञान को बढ़ाने की और उसे प्रचारित करने की हो तो निश्चित ही व्यक्ति को शिक्षा या ज्ञान के क्षेत्र में उच्च पद भी मिलता है और सम्मान भी।

कुंडली(Kundli) में बृहस्पति पहले घर में(Jupiter in First House) अगर कमजोर अवस्था में बैठे हों और उसके नकारात्मक परिणामों की चर्चा करें तो ऐसे व्यक्ति अपने ज्ञान का झूठा बखान करने वाले हो सकते हैं। किसी पाखंड में लिप्त हो सकते हैं। उनके आचरण में नैतिकता की कमी हो सकती है। जीवनसाथी से अनबन रह सकती है। शिक्षा अधूरी रह सकती है। नौकरी आदि में रूकावट बनी रह सकती है। कुंडली में बृहस्पति ग्रह के सकारात्मक परिणाम तभी मिलते हैं जब कुंडली में दूसरे ग्रहों का साथ मिल रहा हो। कुंडली(Kundli) में बृहस्पति ग्रह के नकारात्मक परिणाम भी तभी मिलते हैं जब दूसरे ग्रहों का साथ नहीं मिल रहा हो । दरअसल ग्रह कोई भी हो लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात है कि वो किस राशि में बैठा है उसके ऊपर किन ग्रहों कि दृष्टि है या उसकी किन ग्रहों के साथ युति है , मित्रता है ,शत्रुता है, कितने अंश पर है आदि बहुत सारे आस्पेक्ट होते हैं उसके बाद ही किसी अंतिम परिणाम पर पंहुचा जा सकता है उसके लिए पूरी कुंडली का विश्लेषण जरुरी है।

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार बृहस्पति आकाश तत्व और ईशान दिशा का स्वामी है | मोटापा , चर्बी , पेट और पाचन क्रिया पर इसका अधिपत्य है | गुरु कफकारक है | बुध और बृहस्पति दोनों ग्रहों से बुद्धि देखी जाती है फर्क इतना है बुध से किसी बात को जल्दी समझ लेना होता है जबकि बृहस्पति से विचार और चिंतन देखा जाता है |बृहस्पति ग्रह से जुडी मानसिक क्रियाओं और उपायों से इसके नकारात्मक परिणामों को कम किया जा सकता है।

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