बुध पांचवें घर में (Mercury in Fifth House)

बुध पांचवें घर में (Mercury in Fifth House)

हमारा विषय है : बुध पांचवें घर में(Mercury in Fifth House) बैठा हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं। लेकिन सब्जेक्ट पर आगे बढ़ने से पहले बुध ग्रह और पांचवें घर के बारे में जान लेना जरुरी है। वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) के पांचवें घर(Fifth House) से आत्मा , मंत्री , टैक्स, श्रुति-स्मृति (ज्ञान) , विद्या , पेट, मनोरंजन, बच्चे, प्रारब्ध , क्रिएटिविटी आदि का विचार किया जा सकता है | पांचवे भाव को त्रिकोण भाव भी कहा जाता है | वहीँ बुध(Mercury) ग्रह वाणी का कारक ग्रह है | बुध ग्रह से लेखन कार्य, अध्यापन, गणित, संपादन, प्रकाशन, ज्योतिष, कानून, व्यवसाय,मीडिया आदि का विचार किया जाता है। इसके अलावा खेल, वात, पित, कफ , कला, निपुणता, सत्य वचन, शिल्पकला, मित्र, हरे रंग का विचार भी बुध ग्रह से किया जाता है | ये पापी ग्रहों के साथ पापी एवं शुभ ग्रहों के साथ शुभ फल देता है इसके अलावा यह उत्तर दिशा , कन्या एवं मिथुन राशियों का स्वामी होता है | बुध कन्या राशि में उच्च तथा मीन राशि में नीच का माना गया है। बुध ग्रह को स्पष्टवक्ता, रजोगुणी, पृथ्वी तत्व, नपुंसक ग्रह माना गया है |

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली में बुध पांचवें घर में(Mercury in Fifth House) अगर बलवान होकर बैठा हो तो व्यक्ति बेहद रचनात्मक और कलात्मक रूचि वाला हो सकता है। लेखन और मनोरंजन की दुनिया में सफलता के झंडे गाड़ सकता है। पांचवां घर रोमांस का घर है इसलिए ऐसे व्यक्ति का लेखन रोमांटिक विषयों को लेकर हो सकता है। अभिनय की दुनिया में नाम कमा सकता है। मूल रूप से यहाँ बैठा बुध कला और रचना के माध्यम से अपने आपको प्रस्तुत करता है, अभिव्यक्त करता है। कुंडली(Kundli) में बुध पांचवें घर में(Mercury in Fifth House) हो तो व्यक्ति रिसर्च और विश्लेषण करने में माहिर हो सकता है। उसकी सूक्ष्म दृष्टि और विचारों की गहराई एक नई सोच को जन्म दे सकती है। किसी भी प्रोजेक्ट को एक नई दिशा दे सकते हैं। ऐसे लोग सीखने की कला जानते हैं और ग्रहणशील होते हैं, इसलिए किसी भी नए विचार के लिए तैयार रहते हैं।

इनको प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन और मनन में रूचि हो सकती है। बच्चों के मामले में ऐसे व्यक्ति भाग्यशाली हो सकते हैं। इनका सोशल नेटवर्क बेहद मजबूत हो सकता है। कुंडली(Kundli) के पांचवें घर(Fifth House) में बैठा बुध(Mercury) व्यक्ति को कूटनीति में माहिर बना सकता है। ऐसे लोग जोड़तोड़ में माहिर हो सकते हैं। दूसरे ग्रहों का साथ मिल रहा हो तो व्यक्ति को मंत्री पद दिला सकता है। ऐसे जातकों में दूसरों की सहायता करने का गुण पाया जाता है जो कि कई बार इनके लिए हानि का कारण बन जाता है। हालाँकि ये अपनी भावनाओं को दबाकर रखते हैं लेकिन यदि किसी बात को मन में ठान लें तो उसे ये बड़ी ख़ूबसूरती से अंजाम देते हैं। स्वभाव से ये परफ़ेक्शनिस्ट, आलोचक एवं रूढ़िवादी विचार के होते हैं। ऐसे लोग तीव्र गति से सोचने वाले और प्रतिक्रियावादी होते हैं | कुल मिलकर ऐसे जातक अच्छे समीक्षक होते हैं और वफ़ादार साथी होते हैं। इनको प्रेम संबंधों में सफलता मिलती है ,कोमल स्वभाव के ऐसे लोगों के प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता होती है।

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली में बुध पांचवें घर में(Mercury in Fifth House) अगर कमजोर होकर बैठा हो और उसके नकारात्मक परिणामों की बात करें तो ऐसे व्यक्तियों की तुलना ऐसे बच्चे से की जा सकती है जो अच्छे अच्छे सपने देखता है , कुछ खेलना चाहता है अपने दोस्तों को बुलाना चाहता है लेकिन अचानक सभी दोस्त उसको नजर अंदाज कर देते हैं और उसके साथ खेलने से भी मना कर देते हैं।चूँकि बुध(Mercury) ग्रह(Grah) मित्र का भी कारक होता है इसलिए अक्सर ऐसे लोगों को अपने मित्रों से सहयोग नहीं मिल पाता या उसके मित्र उसको नजरअंदाज कर देते हैं।कुंडली में बुध पांचवें घर में(Mercury in Fifth House) अगर कमजोर होकर यहां बैठा हो तो बुध की ऊर्जा सही दिशा नहीं ले पाती इसलिए व्यक्ति अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाने से चूक जाता है। उनका ध्यान एक साथ कई विषयों में लगा हो सकता है लेकिन अपनी जल्दबाजी के चलते और फोकस की कमी के चलते सफल नहीं हो पाते। अपने आपको अभिव्यक्त करने में परेशानी हो सकती है।

कुंडली(Kundli) में बुध पांचवें घर में(Mercury in Fifth House) अगर कमजोर होकर बैठा हो तो ऐसे व्यक्ति शिक्षा ग्रहण करने में कम रूचि ले सकते है। ऐसे लोगों की शिक्षा अधूरी रह सकती है। ज्ञानी होने का दिखावा कर सकते हैं। अक्सर ऐसे लोगों के मल्टीप्ल अफेयर हो सकते हैं, बदनामी हो सकती है। प्रेम संबंधों में असफलता मिलती है। धीरे धीरे ऐसे लोग सामाजिक जीवन में लोगों से दूर होते चले जाते हैं।ऐसे लोगों को आंत और कब्ज की शिकायत हो सकती है इसके अलावा यौन अंगों में परेशानी हो सकती है। इसलिए इनको अपने खान पान के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार बुध ग्रह से शरीर की स्नायु तंत्र प्रक्रिया, अस्थमा, गूंगापन, मतिभ्रम, नाड़ी कंपन, चर्मरोग,दिमाग, फेंफडे, जीभ, बुद्धि, वाणी का विचार किया जाता है | बुध एक तटस्थ ग्रह है जो जिस ग्रह की संगति में आता है उसके अनुसार जातक को फल देता है। बुध ग्रह को तर्क शक्ति, संचार और मित्र का कारक माना गया है।

बुध ग्रह के सकारात्मक परिणाम तभी मिलते हैं जब दूसरे ग्रहों का साथ मिल रहा हो। बुध ग्रह के नकारात्मक परिणाम भी तभी मिलते हैं जब कुंडली में दूसरे ग्रहों का साथ नहीं मिल रहा हो। बुध ग्रह से सम्बंधित मानसिक तल पर कुछ बदलावों और उपायों से इसके नेगेटिव इफेक्ट्स को कम किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »