बुध चौथे घर में (Mercury in Fourth House)

बुध चौथे घर में (Mercury in Fourth House)

कुंडली में बुध चौथे घर में(Mercury in Fourth House) बैठा हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं। ये जानने से पहले बुध ग्रह और चौथे घर के बारे में जान लेना जरुरी है।वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) की अनुसार चौथे घर(Fourth House) से माता, घर, मित्र, सुगंधी , जेवर, सुख, उच्च शिक्षा, सवारी, लक्ज़री, वाहन, पानी, नदी आदि का विचार किया जाता है | इसे केंद्र भाव भी कहा जाता है | वहीँ बुध(Mercury) ग्रह को स्पष्टवक्ता, रजोगुणी, पृथ्वी तत्व, नपुंसक ग्रह माना गया है | ये पापी ग्रहों के साथ पापी एवं शुभ ग्रहों के साथ शुभ फल देता है इसके अलावा यह उत्तर दिशा , कन्या एवं मिथुन राशियों का स्वामी होता है | बुध कन्या राशि में उच्च तथा मीन राशि में नीच माना गया है। बुध ग्रह को वाणी, बुद्धि और चतुर्थ भाव का कारक भी माना गया है । बुध ग्रह के बारे में और विस्तार से बात करें तो बुध ग्रह वाणी का कारक ग्रह है | बुध ग्रह से ज्योतिष, कानून, व्यवसाय, लेखन कार्य, अध्यापन, गणित, संपादन, प्रकाशन, खेल, वात, पित, कफ , कला, निपुणता, सत्य वचन, शिल्पकला, मीडिया, मित्र, हरे रंग का विचार किया जाता है |

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली में बुध चौथे घर में(Mercury in Fourth House) अगर बलवान होकर बैठा हो तो व्यक्ति भूमि और रियल एस्टेट से जुड़े कामों से सफलता पा सकता है। कुंडली(Kundli) में बुध जिस ग्रह के साथ बैठा हो या जिस ग्रह की उस पर दृष्टि हो उसके गुणों को अपने अंदर समेट लेता है। यहां बैठा बुध व्यक्ति में सीखने की क्षमता और जीवन में आगे बढ़ने की ताकत दे सकता है। मूल रूप से उसका स्वभाव शिक्षा के क्षेत्र की तरफ हो सकता है अगर बृहस्पति ग्रह का साथ मिल जाये तो साहित्य के क्षेत्र में जबरदस्त सफलता दिला सकता है। किसी शिक्षण संस्थान की स्थापना कर सकता है या किसी शिक्षण संस्थान में उच्च पद पर बैठा हो सकता है। ऐसे लोग अपने एकेडेमिक्स पर बहुत ध्यान दे सकते हैं। अक्सर देखा गया है कि ऐसे लोगों का जीवन उम्र बढ़ने के साथ साथ ज्ञान बांटने के लिए बेचैन होने लगता है। इसलिए इनके पास ज्ञान बांटने के लिए लोगों का साथ होना बहुत जरुरी है। जीवन में गतिशील बने रहना इनकी फितरत होती है, विचारवान व्यक्ति होते हैं ।

ऐसे लोगों के दिमाग में बहुत से विचार चलते रहते हैं , बेचैनी हो सकती है , लेकिन चेहरे से शांत नजर आ सकते हैं।कुंडली में बुध चौथे घर में(Mercury in Fourth House) अगर बलवान होकर बैठा हो तो ऐसे लोग ग्रहणशील हो सकते हैं और ऑब्जरवेशन इनका सीखने का सबसे बड़ा जरिया हो सकता है। एक अच्छे आब्जर्वर होने के कारण ऐसे लोगों में एक इनबिल्ट प्रतिभा होती है जिसके बल पर इनको लोगों को पहचानने की अद्भुत क्षमता हो सकती है। यहां बैठे बुध का मूल स्वभाव सीखने का है इसलिए जिस ग्रह का प्रभाव होता है वैसी ही शिक्षा ग्रहण करता है। बुध ग्रह के स्वभाव के कारण ऐसे लोग अपना मत, अपना मन अपने विचार बहुत जल्दी बदलते रह सकते है। ऐसे लोग यात्राओं के शौक़ीन हो सकते हैं। ऐसे लोगों का जुड़ाव अपनी माँ के साथ बहुत अच्छा होता है। अगर इनका लगाव नहीं भी हो तो भी इनकी माँ का लगाव इनके प्रति बेहद अच्छा होता है।वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) के चौथे घर(Fourth House) में बलवान बुध के कारण व्यक्ति को अच्छा घर और अच्छा वाहन मिलता है।

कुंडली में बुध चौथे घर में(Mercury in Fourth House) अगर कमजोर होकर बैठा हो और उसके नकारात्मक परिणामों की बात करें तो व्यक्ति की औपचारिक शिक्षा में बाधा आ सकती है। लोगों के बारे में गलत धारणा बना सकता है। बार बार थूकने की गन्दी आदत हो सकती है। हर वक्त बेचैन रह सकता है। बेचैनी की वजह से एक ही जगह पर बैठना मुश्किल हो सकता है। सीखने में जल्दबाजी के कारण उसको लग सकता है कि वो सीख गया है लेकिन जब सीखे हुए ज्ञान की अभिव्यक्ति की बारी आती है तब वो शुन्य में झाँकने लगता है। इसलिए जीवन में फोकस बहुत जरुरी है। इनको एक ही चीज पर फोकस करने में दिक्कत हो सकती है। जमीन से जुड़े मामलों में नुक्सान उठाना पड़ सकता है।इनको छाती से जुड़े रोग होने की प्रबल संभावना रहती है इसके अलावा तंत्रिका तंत्र से जुड़े विकार भी हो सकते हैं।

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली में बुध(Mercury) ग्रह से शरीर की स्नायु तंत्र प्रक्रिया, अस्थमा, गूंगापन, मतिभ्रम, नाड़ी कंपन, चर्मरोग,दिमाग, फेंफडे, जीभ, बुद्धि, वाणी का विचार किया जाता है | बुध एक तटस्थ ग्रह है जो जिस ग्रह की संगति में आता है उसके अनुसार जातक को फल देता है। बुध ग्रह को तर्क शक्ति, संचार और मित्र का कारक माना गया है। बुध ग्रह कि अशुभ परिणाम तभी मिलते हैं जब कुंडली(Kundli) में दूसरे ग्रहों का साथ नहीं मिल रहा हो। बुध ग्रह कि शुभ परिणाम भी तभी मिलते हैं जब दूसरे ग्रहों का साथ मिल रहा हो। बुध ग्रह से सम्बंधित मानसिक बदलावों और उपायों से इसके बुरे प्रभावों को कम किया जा सकता है। शेष प्रभु इच्छा।

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