राहु पहले घर में (Rahu in First house)

राहु पहले घर में (Rahu in first house)

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) के पहले घर(First House) में राहु(Rahu) जातक के लिए कई मायनों में अच्छा है| हालाँकि इस पोजीशन में बैठा राहु(Rahu) व्यक्ति को दूसरों पर डिपेंडेंट कर सकता है | यहां बैठा राहु(Rahu) दूसरों के लिए अपने आप को बलिदान कर सकता है |लेकिन ऐसा व्यक्ति अपनी बुद्धि से धन कमाने वाला और अच्छा अविष्कारक हो सकता है । यंहा बैठे राहु(Rahu) का आपके लिए सन्देश है कि आपको दूसरों के साथ ईमानदारी से पेश आना चाहिए और नए अनुभवों से गुजरने के लिए तैयार रहना चाहिए| साथ ही साथ अपनी नेतृत्व क्षमता का विकास भी करते रहना चाहिए । आपको तानाशाही रवैया छोड़ना होगा क्योंकि जीवन में उतार चढ़ाव का सिलसिला जारी रहता है| ज्यों ही आपके जीवन में उतार शुरू होगा तो आप अपना आत्मविश्वास खो सकते हैं| इसलिए अच्छा होगा अपने प्रयासों और जीवन की व्यवहारिकता में मॉडरेट रहें , वर्ना जीवन में टकराव निश्चित है ।

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) के पहले घर(First House) से व्यक्तित्व ,रूप, सिर, चेहरा आदि का विचार किया जाता है |यंहा बैठे राहु(Rahu) का आपके लिए साफ़ सन्देश है कि आप अपने व्यक्तित्व के जिस पहलु कि उपेक्षा करेंगे वही पहलु आपके जीवन के आधार को नुक्सान पहुचायेंगे । आप स्वभाव से जिद्दी हो सकते हैं और ड्रग एडिक्शन का शिकार हो सकते हैं | जिसके कारण समाज में बेहतर रिश्ते बनाने में रूकावट आ सकती है और आपका वैवाहिक जीवन प्रभावित हो सकता है ।पहले घर(First House) में राहु(Rahu) व्यक्ति को आलसी और निष्क्रिय बना सकता है हालाँकि ऐसा व्यक्ति महत्वाकांक्षी होता है । प्रेम संबंधों के मामलों में रोमांटिक हो सकता है| विवाह जैसी संस्था में भरोसा न रखकर क्षण भंगुर सुख की तलाश में लगा रह सकता है । भावनाओं के ज्वार में अपने आप को डालकर वास्तविक प्यार से दूर जा सकता है ।

अपने आलस्य के कारण आप दूसरों को अपने विचारों और परिस्थितियों में दखल की मौन स्वीकृति देकर अपनी पहचान खो सकते हैं । इसलिए कुंडली(Kundli) के पहले घर(First House) में बैठे राहु(Rahu) का आपके लिए सन्देश है कि ऊर्जावान बनने कि कोशिश करें और सेल्फ परसेप्शन को दुरुस्त करें| दूसरों के बारे में अपने विचार बनाने से पहले अपनी नियत पर ध्यान दें| संबंधों को आदर देकर अपनी पहचान बरकरार रखें । समाज में आपकी छवि या तो तानाशाह की या बहुत ही बेचारगी वाले व्यक्ति की बन सकती है |इसलिए बहुत अधिक मुखर होना और बहुत अधिक विनम्र होना दोनों ही हानिकारक हैं । सम्बन्ध सह अस्तित्व और सद्भाव पर ही चल सकते हैं । आपके लिए सम्बन्ध एक चुनौती बन सकते हैं |आप जटिलता महसूस कर सकते हैं इसलिए दूसरों पर हावी होने की कोशिश कम कर देनी चाहिए| अपने व्यवहार के प्रति आपको जागरूक होना पड़ेगा| खासकर तब जब आप निष्क्रियता से अचानक सक्रिय भूमिका में आते हैं ।

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) के पहले घर(First House) से व्यक्तित्व ,रूप, सिर, चेहरा आदि का विचार किया जाता है |यंहा बैठे राहु(Rahu) का साफ़ सन्देश है कि आप अपने व्यक्तित्व और अपनी आदतों में बदलाव लेकर आएं| अपने ऊपर काम करें और अपने व्यवहार और आवेगों को नियंत्रण में रखें । आप अपने साथियों के लिए अपना व्यक्तित्व और अपने अधिकार छोड़ सकते हैं| फिर भी आपको अपनी भावनाओं और इच्छाओं को प्रभावित करने कि अनुमति नहीं देनी चाहिए| वर्ना आपको जीवन में वही दर्द और संघर्ष बार बार झेलना पड़ेगा । आपको अपनी महत्वाकांक्षाओं और खुद के विकास के लिए जो भी जरुरी है उन चीजों से दूसरों पर डिपेंडेंट होने कि आदत छोड़नी पड़ेगी| उसके बाद ही आप संतुष्टि और उपलब्धि हासिल कर सकते हैं| ऐसा करना मुश्किल भी नहीं है क्योंकि आपको सिर्फ अपनी निष्क्रियता को छोड़ना है और दूसरों को अपने जीवन में हस्तक्षेप करने से रोकना है ।

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) में राहु(Rahu) को भ्रम का कारक माना गया है| इसलिए राहु कि दशा में सावधानी बरतनी चाहिए| उसके बाद आपके जीवन में सफलता ही सफलता है| क्योंकि मूल रूप से आप एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति हैं । संक्षेप में आपको आसानी से समझौता करने में सावधानी बरतनी चाहिए इसके अलावा आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता पर काम करना चाहिए । इसके बाद राहु(Rahu) कि यह स्थिति आपके लिए निश्चित ही सुख समृद्धि और सफलता लेकर आएगी । अकेले राहु(Rahu) ग्रह(Grah) की स्थिति के आधार पर अंतिम निर्णय नहीं करना चाहिए| इसके लिए पूरी कुंडली(Kundli) का विश्लेषण जरुरी है ।

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