केतु (Ketu in Astrology)
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- Posted in Rahu-Ketu
- On March 8, 2020
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केतु (Ketu in Astrology)
वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुण्डली(Kundli) में केतु(Ketu) भी राहु(Rahu) की तरह छाया ग्रह(Grah) है ये भौतिक पिंड नही है । केतु(Ketu) धनु राशि(Rashi) में उच्च और मिथुन राशि(Rashi) में नीच का होता है। फोड़े – फुंसी, चेचक, विष आदि का विचार केतु(Ketu) से किया जाता है । राहु(Rahu) शनि(Shani) की तरह तो केतु(Ketu) मंगल की तरह फल देता है । ये कुरूप, तमोगुणी और पापी ग्रह(Grah) है । इसके अलावा वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुण्डली(Kundli) में गुप्त विद्या और तंत्र मंत्र का विचार भी केतु(Ketu) से किया जाता है । ये अपने भक्तों को अच्छा स्वास्थ्य, धन-संपदा व पशु-संपदा दिलाता है। मनुष्य के शरीर में केतु(Ketu) अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। केतु(Ketu) लाभ और हानि दोनों ही देता है | लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान देने के लिए केतु(Ketu) को भौतिक हानि करते देखा गया है ।
वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुण्डली(Kundli) में केतु(Ketu) के बलवान होने से जातक जीवन में अच्छी ऊंचाइयों पर पहुंचते हैं| जिनमें से अधिकांश आध्यात्मिक ऊंचाईयों पर होते हैं। शुभ केतु(Ketu) व्यक्ति को देवता बना देता है । ये ग्रह(Grah) तर्क, बुद्धि, ज्ञान, वैराग्य, कल्पना, अंतर्दृष्टि और अन्य मानसिक गुणों का कारक है। माना जाता है कि केतु(Ketu) भक्त के परिवार को समृद्धि दिलाता है| सर्पदंश या अन्य रोगों के प्रभाव से हुए विष के प्रभाव से मुक्ति दिलाता है। केतु(Ketu) स्वभाव से मंगल की भांति ही एक क्रूर ग्रह(Grah) हैं । यह ग्रह(Grah) तीन नक्षत्रों का स्वामी है: अश्विनी, मघा एवं मूल नक्षत्र।
केतु(Ketu) जन्म कुण्डली(Kundli) में राहु(Rahu) के साथ मिलकर कालसर्प योग की स्थिति बनाता है। प्रथम भाव में अर्थात लग्न में केतु हो तो जातक चंचल, डरपोक , दुराचारी होता है। दुसरे घर में विरोधी तो तीसरे में वातरोगी बनाता है । चौथे और पांचवें भाव में बहुत बातूनी और कुबुद्धि हो सकता है । छठे में कम खर्च करने वाला तो सातवें में शत्रु से डरने वाला आठवें में चालाक और नवें में सुख चाहने वाला और दसवें में पिता के विपरीत आचरण वाला होता है । 11 वे भाव में केतु(Ketu) लाभदायक और 12वें में शत्रु पर विजय पाने वाला होता है ।वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) में राहु और केतु की उच्च और नीच राशियों को लेकर कुछ मतभेद भी हैं |


