राहु (Rahu in Astrology)

राहु (Rahu in Astrology)

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) में राहु(Rahu) ग्रह(Grah) भौतिक पिंड नही है, छाया ग्रह(Grah) है| इसका स्वभाव शनि(Shani) की तरह होता है । ये मिथुन राशि(Rashi) में उच्च तथा धनु राशि(Rashi) में नीच का माना गया है । राहु(Rahu) को भ्रम का कारक माना जाता है । इसके अलावा राहु(Rahu) से कुष्ट रोग, चर्मरोग, मानसिक उत्तेजना, विष आदि का विचार किया जाता है । राहु(Rahu) पश्चिम दिशा का स्वामी , वायु तत्व और तमोगुणी है । राहु(Rahu) से अचानक धन प्राप्ति , शराब, नशा , जासूसी, अचानक दुर्घटना का विचार भी किया जाता है ।

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) में राहु(Rahu) और केतु(Ketu) सूर्य एवं चंद्र के परिक्रमा पथों के आपस में काटने के दो बिन्दुओं के द्योतक हैं| जो पृथ्वी के सापेक्ष एक दुसरे के उल्टी दिशा में (१८० डिग्री पर) स्थित रहते हैं। राहु(Rahu) पौराणिक संदर्भों से धोखेबाजों, विदेशी भूमि में संपदा विक्रेताओं, ड्रग तस्करों , विष व्यापारियों, निष्ठाहीन और अनैतिक कृत्यों, आदि का प्रतीक रहा है। राहू(Rahu) के दोषों में लाभ पाना है तो घर में रॉक सॉल्ट लैंप रखें। वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) में राहु(Rahu) का परिवर्तन दुर्घटनाओं का कारक भी होता हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि सभी घटनाएं अशुभ हों, कुछ घटनाएं शुभ भी होती हैं।

कुंडली(Kundli) में राहु(Rahu) विपरीत होने पर ससुराल वालों को प्रसन्न रखना चाहिए। अगर राहु(Rahu) परेशान कर रहा है तो उस स्थिति में प्रतिदिन रात्रि के समय सोने से पहले गुनगुने पानी में नमक मिलाएं और उस पानी से हाथ-पैर धोकर फिर सोएं। यह अधार्मिक व्यक्ति, निर्वासित, कठोर और झूठी बातें करने वाले, मलिन लोगों का प्रतीक रहा है। इसके द्वारा पेट में अल्सर, हड्डियों की समस्याएं आती हैं। राहु(Rahu) व्यक्ति के शक्तिवर्धन, शत्रुओं को मित्र बनाने में महत्वपूर्ण रूप से सहायक रहता है। वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) में 3,6 और 11 वे भाव में राहु(Rahu) शुभ फल करता है ।

वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) के अनुसार कुंडली(Kundli) में तीसरे भाव में स्थित राहु(Rahu) पराक्रम में बढ़ोत्तरी कर देता है। छठे भाव में मजबूत स्थिति में बैठा राहु(Rahu) शत्रु व रोग नाशक बन जाता है।कुंडली(Kundli) में यदि छ्ठे स्थान पर शुक्र अथवा गुरु आदि शुभ ग्रहों की दृष्टि हो या इस स्थान पर शुक्र व राहु(Rahu) की युति हो तो विशेष शुभ फल प्राप्त होते हैं। 11वें भाव में राहु(Rahu) हो तो इस स्थिति में संबंधित जातक को व्यापार-उद्योग, सट्टा-लॉटरी, शेयर बाज़ार आदि में एकाएक भारी मात्रा में लाभ प्राप्त होता है। वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) में और राहु(Rahu) और केतु(Ketu) की उच्च और नीच राशियों को लेकर कुछ मतभेद भी हैं |

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