कालरात्रि महारात्रि (Kaalratri Maharatri)

कालरात्रि महारात्रि (Kaalratri Maharatri)

हमारा विषय है दीपावली और तंत्र पर विशेष - KAALRATRI MAHARATRI - कालरात्रि महारात्रि : दीपावली की रात् को तंत्रशास्त्र की महारात्रि कहा जाता है। तंत्र वास्तव में एक शुद्ध विज्ञान है। सिद्धांतों, नियमों पर आधारित एक विशेष क्रिया द्वारा की गयी साधना जब प्रकट होती है तो दूसरे लोगों की नजर में ये एक अलौकिक शक्ति या रहस्मयी विद्या बन जाती है। आम आदमी के लिए इसे गुप्त रखा गया है ताकि कोई इसका दुरूपयोग न कर सके। क्योंकि तंत्रशास्त्र में टोना, टोटका, उपाय, सिद्धि आदि के बहुत से प्रयोग है जिसे कुछ लोग अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए दुरूपयोग कर सकते हैं ।

दीपावली की रात को तंत्र-मंत्र की रात(KAALRATRI MAHARATRI -कालरात्रि महारात्रि) इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन अदृश्य शक्तिया जाग्रत हो जाती है। इस दिन का तंत्र(TANTRA) के साधक बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं और अपनी परम्पराओं के अनुसार अपने शिष्यों और भक्तों को शास्त्रीय कवच और यंत्र देकर उनको रक्षा कवच देते है उनकी साधना की उन्नति की कामना के यंत्र देकर उनको आशीर्वाद देते हैं। अपने अपने तरीके से शक्तियों को बढ़ाने का काम करते हैं और नयी शक्तियों का आवाह्न करते हैं। दरअसल तंत्रशास्त्र का वर्णन अर्थववेद में भी मिलता है और सीधा संबंध ऋग्वेरद काल से माना जाता है।

तंत्र(TANTRA) और तंत्र-मंत्र की रात(KAALRATRI MAHARATRI -कालरात्रि महारात्रि) पर बहुत कुछ कहा गया है और बहुत कुछ लिखा गया है , मेरे गुरु कहते हैं " तंत्र का बिलकुल आधारभूत–परंतु अत्यंत विद्रोहात्मक, अत्यंत क्रांतिकारी दर्शन यह है कि संसार ऊंच और नीच में बंटा हुआ नहीं है, वह एक है, संयुक्त है। इस संसार में उत्कृष्ट और निकृष्ट दोनों हाथ में हाथ डाले हुए हैं। अच्छे में बुरा समाहित है और बुरे में अच्छा मिला हुआ है। चूंकि क्षण में भी निकृष्ट छिपा हुआ है, इसलिए जो निकृष्ट है उसका इंकार नहीं किया जाना चाहिए। उसकी निंदा नहीं करनी चाहिए। जो निकृष्ट है उसका रूपांतरण होना चाहिए। जो निकृष्ट है उसे यदि ऊपर उठने का मौका दिया जाए तो वह भी श्रेष्ठ बन सकता है। भगवान और शैतान के बीच ऐसी कोई खाई नहीं है जिस पर सेतु न बनाया जा सके। शैतान के हृदय की गहराई में भी परमात्मा छिपा हुआ है। एक बार हृदय धड़कना शुरू हो जाए तो शैतान परमात्मा बन जाता है....

यही कारण है कि शैतान के लिए अंग्रेजी में दिया गया शब्द ‘डेविल’ जिस धातु से बना है उसका भी वही अर्थ होता है जो भगवान के लिए दिए गए शब्द ‘डिवाइन’ से होता है। ‘डेविल’ शब्द ही ‘डिवाइन’ से बना है। शैतान का मतलब तो इतना है कि जो अभी परमात्मा नहीं हुआ। शैतान न तो परमात्मा के विरोध में है, न वह परमात्मा को नष्ट करने के प्रयास में है, वस्तुतः शैतान तो परमात्मा की खोज में है। शैतान तो परमात्मा बनने के मार्ग पर है, शत्रु कहां, वह तो बीज है। परमात्मा अपने पुरजोश में खिला हुआ वृक्ष है, जब कि शैतान अभी बीज है। परंतु बीज में ही वृक्ष छिपा है, और बीज वृक्ष का दुश्मन नहीं है। असलियत तो यह है कि बिना बीज के वृक्ष हो ही नहीं सकता। बीज वृक्ष विरोधी नहीं है, बड़ी घनी मित्रता है दोनों में, दोनों एक साथ जुड़े हैं। जहर और अमृत दोनों एक ही शक्ति के दो रूप हैं, वैसे ही जैसे जीवन और मृत्यु, दिन और रात, प्रेम और घृणा, संभोग और समाधि। तंत्र(TANTRA) कहता है: किसी चीज की निंदा न करो, निंदा करने की वृत्ति ही मूढ़तापूर्ण है। निंदा करने से तुम अपने विकास की पूरी संभावना रोक देते हो। कीचड़ की निंदा न करो, क्योंकि उसी में कमल छिपा है। कमल पैदा करने के लिए कीचड़ का उपयोग करो। माना कि कीचड़ अभी तक कीचड़ है कमल नहीं बना है, लेकिन वह बन सकता है। जो भी व्यक्ति सृजनात्मक है, धार्मिक है, वह कमल को जन्म देने में कीचड़ की सहायता करेगा, जिससे कि कमल की कीचड़ से मुक्ति हो सके।

आदमी है, अमावस की रात। और दिवाली तुम बाहर कितनी ही मनाओ, भीतर का अंधेरा बाहर के दीयों से कटता नहीं, कटेगा नहीं। धोखे तुम स्वयं को कितने ही दो, अंतत: पछताओगे। दिवाली हम अमावस की रात मनाते हैं! रात है अंधेरे की, तो दीयों की पंक्तियां जला लेते हैं। पर दीए तो बाहर होंगे। दीए भीतर नहीं जा सकते। बाहर की कोई प्रकाश की किरण भीतर प्रवेश नहीं कर सकती। भीतर की अमावस तो भीतर ही रहती है। बाहर की पूर्णिमा कितनी ही बनाओ, तुम तो भीतर जानते ही हो उस बुझे हुए दीपक को। तुम तो भीतर रोते ही रहोगे। तुम्हारी सब मुस्कुराहटें भी तुम्हारे आंसुओं को छुपाने में असमर्थ हैं। और छुपा भी लें तो सार क्या? मिटाने में निश्चित ही असमर्थ हैं।

इसलिए सारे ज्ञानी कहते हैं : बाहर से तादात्म्य छोड़ो। मन को बाहर मत अटकाओ। बाहर से सारे सेतु काट दो। और तब अचानक एक प्रकांड ऊर्जा घर की तरफ वापिस लौटती है; जैसे गंगा वापिस लौट पड़े गंगोत्री में, ऐसी आंदोलनकारी घटना घटती है। तुम्हारी ही ऊर्जा जब तुम्हारे ऊपर वापिस लौटती है, रोशन हो जाते हो तुम।"

तंत्र-मंत्र की रात(KAALRATRI MAHARATRI -कालरात्रि महारात्रि) पर ज्योतिषशास्त्र के अनुसार बात करें तो तंत्र(TANTRA) के बहुत से कर्म रात्रि के समय किए जाते हैं । दीपावली पर चंद्रमा बलहीन हो जाता है तभी अभिचार कर्मा अपने परचम पर होता है, यानी अन्धकार में। अँधेरा बहुत गहरे में अँधेरा नहीं है वो सिर्फ अनुपस्थिति है प्रकाश की। तंत्र के बड़े से बड़े साधनों में इसे ज्ञान प्राप्ति का साधन माना गया है। ये शरीर है दीपक जो मिटटी का बना है लेकिन दीपक को नहीं पता की वो रौशनी भी फैला सकता है जब तक उसमे ज्योति न जले। मेरे गुरु कहते हैं "दीया सबको प्रकाशित कर देता है और खुद अंधेरे में डूबा रह जाता है। तुम सब को देख लेते हो, बस खुद ही का दर्शन नहीं हो पाता। जब तक ज्योति शरीर के सहारे है, जब तक तुमने समझा है कि मैं शरीर हूं, जब तक ज्योति को यह भ्रांति है वह दीया, मिट्टी का दीया है; जब तक ज्योति ने साफ-साफ नहीं पहचान लिया कि दीया मिट्टी है और मैं मिट्टी नहीं, आत्मा अग्निधर्मा है, शरीर मिट्टी है...

तुमने देखा, कि अग्नि का एक स्वभाव है वह सदा ऊपर की तरफ जाती है, ऊपर... ऊपर। तुम दीये को उल्टा भी कर दो, तो भी ज्योति ऊपर की तरफ जायेगी। तुम ज्योति को उल्टा न कर पाओगे। अग्नि का स्वभाव है ऊर्ध्वगमन। इसलिए सारे ज्ञान को उपलब्ध व्यक्तियों ने आत्मा को अग्निधर्मा कहा है। इसलिए जरथुस्त्र को माननेवाले चैबीस घंटे दीये को जलाये रखते हैं मंदिर में। वह सिर्फ इस बात की खबर है कि अग्नि तुम्हारा स्वभाव है इसलिए सारी दुनिया में अग्नि की पूजा हुई। हिंदू सूर्य को नमस्कार करते हैं। वह नमस्कार सिर्फ अग्नि के ऊर्ध्वगामी स्वभाव को है। यह अंधेरा कब तक रहेगा? जब तक तुमने स्वयं को शरीर माना है, यह अंधेरा रहेगा। जब तक दीया है, तक तक अंधेरा रहेगा। ज्योति अकेली हो, फिर उसके नीचे कोई अंधेरा नहीं रहेगा। ज्योति सहारे से है। थोड़ी देर को सोचो, ज्योति, ज्योति मुक्त हो गई अकेली आकाश में, उसके चारों तरफ प्रकाश होगा। तुम सबको समझ लेते हो, बस एक ही अनसमझा रह जाता है-- वह तुम स्वयं हो। तुम सबकी सहायता कर देते हो, बस एक ही असहाय रह जाता है-- वह भीतर। तुम चारों तरफ संपत्ति के ढेर लगा लेते हो, बस भीतर एक खालीपन, एक निर्धनता रह जाती है।"

हमारे यहां धन को कुबेर से जोड़ा जाता है। एक कथा के अनुसार पूर्वजन्म में कुबेर चोर थे एक बार चोरी के इरादे से शिव मंदिर में घुस गए रौशनी करने के लिए दीपक जलाया लेकिन हवा के झोंके से बुझ गया। कुबेर उसे बार बार जलाते और हर बार हवा के झोंके से दीपक बुझ जाता जब यही क्रम बार बार चला तो भोले भंडारी औघड़ शंकर ने इसे अपनी आराधना मानकर कुबेर को धनपति होने का आशीर्वाद दे दिया।

एक लोककथा ये भी है की इस रात देवी लक्ष्मी अपनी बहन दरिद्रा के साथ भू-लोक की सैर करने आती हैं। जिस घर में साफ-सफाई होती है वहां लक्ष्मी प्रवेश कर जाती हैं और जिस घर में स्वच्छता नहीं होती वहां दरिद्रा ठहर जाती हैं।

तंत्र-मंत्र की रात(KAALRATRI MAHARATRI -कालरात्रि महारात्रि) पर धन लाभ की बात करें तो दीपावली की रात एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर अपनी पसंद के अन्न से स्वास्तिक बनाएं उसके ऊपर एक थाली रखकर कुंमकुंम से ‘गं’ लिखें और श्वेत अर्क को गणपति की तरह विराजमान करके 'ॐ सर्व सिद्धि प्रदीयसि त्वं सिद्धि बुद्धिप्रदो भवः श्रीं’। इस मंत्र का १०८ बार पाठ करें।श्री लक्ष्मी यंत्र के सामने दीपावली से शुरू कर के हर रोज 'ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्मयै नमः’ मंत्र का १०८ बार पाठ करें धन लाभ होगा।तंत्र के बाजारीकरण और बदलते समय के साथ दीपावली पर होने वाले टोने-टोटके और तांत्रिक गतिविधियों में अब कई तरह के बदलाव आ गए हैं। लोग कई प्रकार के तंत्र-मंत्र के लिए विचित्र टोने-टोटके अपनाते हैं। कुछ लोग अपने दुश्मनों को हराने या मारने तो कुछ लोग अपने जीवन की बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए भी अजीब टोटके इस्तेमाल करते हैं। खैर मेरा मकसद यहां किसी को नीचा दिखाने का नहीं है।दीपावली पर सबसे अधिक तंत्र(TANTRA) और टोटकों का प्रयोग किया जाता है। इसलिए इस दिन खुद को बचाये रखने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए। सुनसान रास्तों और अनजान व्यक्ति के दिए हुए खाने आदि से बचना चाहिए।

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