कर्म और भाग्य – ज्योतिष की दृष्टि में – 3 (Karm aur Bhagya Kya Hai – 3 )

कर्म और भाग्य - ज्योतिष की दृष्टि में -3 (Karm aur Bhagya Kya Hai -3 )

जब मैंने अपनी सीरीज "कर्म और भाग्य क्या है- Karm Aur Bhagya kya hai - ज्योतिष(Astrology) की दृष्टि में " शुरू की थी तो मैंने बिलकुल नहीं सोचा था कि मुझे उन पहलुओं पर भी चर्चा करनी पड़ेगी जिस पर नज़र तो सबकी है लेकिन अपने अपने कारणों से अपनी आँखें बंद कर लेते हैं । इस जगत में जीवन अपने आप में एक अद्भुत घटना है और जीवन चक्र में मानव द्वारा की गयी खोजों में ज्योतिष(Astrology) भी एक बहुत बड़ी घटना है । ज्योतिष(Astrology) एक गंभीर और बड़ा विषय है , इसका विस्तार बहुत बड़ा और अनेक दिशाएं हैं। लेकिन आज के दौर में इसे एक तिरस्कृत और मजाक का विषय बना दिया गया है और इसके अनेक कारण हैं जिसमे ज्योतिष(Astrology) की कोई जिम्मेदारी नहीं है , लेकिन कुछ मायनों में हमारे ज्ञान, हमारे व्यवहार और ज्योतिष(Astrology) व ज्योतिषी(Astrology) के प्रति हमारी अवधारणा की भूमिका है । आज हम देख रहें हैं सोशल मीडिया का दौर है , लोगों को गूगल क्लिक/इंटरनेट क्लिक से ज्ञान और जानकारी फ्री में उपलब्ध है , ज्योतिष(Astrology), वैदिक ज्योतिष(Astrology) टाइप करो तो हजारों की संख्या में एस्ट्रोलॉजी के साइट और ब्लॉग उपलब्ध हैं और ज्योतिषी(Astrology) भी । मेरा मकसद आपका ध्यान ज्योतिष(Astrology) के विषय में हमारी गम्भीरता को दर्शाना है , हम कितने गंभीर हैं ये हमारे सवालों में भी झलकता है और जवाबों में भी , तो इसका मतलब जिम्मेदार भी हम ही है । और एक एक व्यक्ति अपना सवाल सैंकड़ों ज्योतिषियों से करता है और सैंकड़ो जवाबों से कंफ्यूज भी हो जाता है । जबकि सच्चाई ये है कि बहुत सी घटनाओं को बदला जा सकता है ,विज्ञान ने बहुत कुछ संभव भी बना दिया है , व्यक्ति के पास बुद्धि और विवेक दोनों हैं , इसका जवाब आपको आगे मिल सकता है ।मैंने अपने पिछले लेख में बताया था कि अब तो वैज्ञानिक भी मानते है कि प्रत्येक ग्रह(Grah) की रेडियो एक्टिविटी अलग है , तरंग अलग है । गुरु , शुक्र , बुध , शनि सब ग्रहों के रेडियो एक्टिव एलिमेंट अलग हैं उनकी अपनी एक अलग ध्वनि है अपना वातावरण है । कई जाने माने गणितज्ञ और वैज्ञानिकों का मानना है कि कोई भी राशि, नक्षत्र , ग्रह(Grah) या उपग्रह जब यात्रा करता है तो अंतरिक्ष में एक विशेष तरंगें और ध्वनि पैदा होती है। और प्रत्ये्क नक्षत्र, ग्रह(Grah) और उपग्रह की अपनी भी ख़ास ध्वनि पैदा होती है - इन सब ध्वनियों के ताल मेल से एक हारमनी पैदा होती है एक तरह के संगीत की लयबद्धता पैदा होती है - यही लयबद्धता और रेडियो एक्टिव एलिमेंट से एक वातावरण बनता है उस वातावरण में, उस क्षण में मनुष्य जब जन्म लेता है तो उसके चित्त पर हमेशा के लिए वो अंकित हो जाता है या कहे एक पिक्चर , एक फोटो क्लिक हो जाता है । इसका मतलब प्रत्येक व्यक्ति अपने अंदर एक बिल्ट -इन व्यक्तित्व लेकर पैदा होता है वैसे ही जैसे कोई भी बीज । एक फोटो नेगेटिव इमेज के साथ जिसका अब पॉजिटिव बनना बाकी है ।आज नहीं तो कल हम इसे डिकोड कर सकते हैं , मौसम विज्ञान की तरह ज्योतिष(Astrology) में भी उपकरणों का उपयोग हो सकता है और मुझे वो दिन बहुत दूर नहीं लगता ।प्रत्येक व्यक्ति अपने अंदर एक बिल्ट -इन व्यक्तित्व लेकर पैदा होता है वैसे ही जैसे कोई भी बीज- जिसे हम भाग्य(Bhagya) कहते हैं और इसी लम्बी श्रृंखला को प्रारब्ध । भाग्य(Bhagya) या एक बीज की क्या संभावना हो सकती है इसका एक बेहतरीन उदाहरण भगवान् महावीर और गोशालक की कथा से समझा जा सकता है , कथा थोड़ी लम्बी है लेकिन उसका सार रूप है -- कथा है महावीर और गोशालक एक रास्ते पर जा रहे हैं , गोशालक ने एक पौधे के पास रूककर महावीर से पूछा कि बताईये इस पौधे में फूल लगेगा या नहीं तो महावीर ने ध्यान लगाया और बोले -- इसमें फूल लगेगा , ये सुनकर गोशालक ने पौधे को उखाड़कर फेंक दिया और दोनों आगे बढ़ गए , बारिश के दिन थे कुछ दिनों बाद दोनों उसी रास्ते से लौट रहे थे तो महावीर अचानक उसी जगह आकर रुक गए जंहा गोशालक ने पौधे को उखाड़कर फेंक दिया था , रूककर बोले गोशालक देखो पौधे पर फूल उग आया है, बारिश की वजह से पौधे ने दोबारा अपनी जड़ें जमा ली थी। गोशालक बड़ा हैरान हुआ , कहानी तो आगे भी चलती है लेकिन यंहा इसका जिक्र करने का मकसद ये भी बताना था कि ज्योतिष(Astrology) संभावनाओं का भी विज्ञान हैं और बिल्ट इन व्यक्तित्व को देख लेना ही ज्योतिष(Astrology) का मकसद है ,इसलिये ज्योतिष(Astrology) अध्यात्म का अटूट अंग है । महावीर ने उस समय उस पौधे के बिल्ट-इन व्यक्तित्व को देखा और उसकी संभावनाओं के द्वार में झांककर उसकी जीवटता को भी देखा और ज्योतिष इन्ही संभावनाओं को देखने का विज्ञान है ।हमारे अस्तित्व को हम तीन भागों में बांटकर देखेंगे तो भाग्य(Bhagya) की अवधारणा को समझने में आसानी होगी जैसे - आत्मा , मन और शरीर या इसे कह सकते हैं तीन तल हैं आत्मिक तल , मानसिक तल और शारीरिक तल । ये जो बिल्ट -इन व्यक्तित्व है उसके तीन तल हैं ।आत्मिक तल वो तल है ये वो अवस्था है जिसको जाना तो जा सकता है (जैसे महावीर ने जाना) लेकिन कोई भी बदलाव संभव नहीं, ये सबसे गहरा तल है इसको जानने के लिए ही ज्योतिष(Astrology) की खोज हुई , एक विज्ञान बना । मानसिक तल वो अवस्था है जिसको जानकर या समझकर उसमे बदलाव किया जा सकता है , अगर जान लिया जाये तो बदला जा सकता है अगर अनजान रहे तो कुछ नहीं किया जा सकता बीज रूप में जो है , वही होता चला जाता है - और ये वो महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसमे ज्योतिष(Astrology) का सबसे ज्यादा उपयोग किया जा सकता है और तीसरा तल है शारीरिक जो हमें अपने माँ बाप से मिलता है ये बायोलॉजिकल है , सब कुछ सांयोगिक है ,लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारा शारीरिक तल मानसिक तल से ज्यादा जुड़ा हुआ है हमारे मन पर ही ज्यादा निर्भर है । ज्योतिष(Astrology) से सम्बंधित हमारे ज्यादातर सवाल शारीरिक तल के ही होते हैं जिन्हे आसानी से बदला जा सकता है । मानसिक तल वो तल है जिनके बारे में अगर पहले पता चल जाये तो उनमे बदलाव किये जा सकते हैं ।"कर्म और भाग्य क्या है- Karm Aur Bhagya kya hai : इसकी और गहराई में जाएं तो - मनुष्य कर्म(Karm) करने को स्वतंत्र है कर्म(Karm) से बहुत कुछ बदला जा सकता है , कर्म(Karm) पर अधिकार तो है लेकिन फल पर नहीं इसलिए मनुष्य परम स्वतंत्र भी है और परम परतंत्र भी या कहे परम स्वतंत्र है अपनी सीमाओं के भीतर । इसे एक छोटी सी कहानी से समझा जा सकता है - कथा है एक शिष्य ने अपने गुरु से पूछा कि कर्म(Karm) करने में आदमी स्वतंत्र है कि परतंत्र ! तो गुरु ने कहा - सामने आओ और अपना एक पैर उठा कर खड़े हो जाओ , शिष्य ने कहा हमने सवाल किया है कि आदमी स्वतंत्र है कि परतंत्र, इसमें पैर उठाना कंहा से आ गया ! तो गुरु ने कहा - जैसा कहा है वैसा करो - अपना एक पैर उठाओ , शिष्य बेचारा एक पैर - अपना दांया पैर उठा कर खड़ा हो गया । गुरु ने कहा अब अपना बांया पैर भी उठाओ , शिष्य तो हैरान हुआ उसने कहा गुरुदेव आप भी कैसी बात कर रहे हैं , मै गिर जाऊंगा । गुरु ने शिष्य से कहा तू पहले बांया पैर भी उठा सकता था लेकिन तूने दांया उठाया इसलिए अब बांया नहीं उठा सकता । गुरु ने कहा कि एक पैर उठाने को आदमी सदा स्वतंत्र है। लेकिन एक पैर उठाते ही तत्काल दूसरा पैर बंध जाता है। तो जो मानसिक तल है उसमें हम पूरी तरह पैर उठाने को स्वतंत्र हैं। लेकिन ध्यान रखना उसकी अपनी सीमायें है ।"कर्म और भाग्य क्या है- Karm Aur Bhagya kya hai : इसकी और गहराई में जाएं तो इस जगत में सब कुछ जुड़ा हुआ है , सब कुछ संयुक्त है, मैं सांस लेता हूं तो पूरा का पूरा शरीर प्रभावित होता है। सूरज सांस लेता है तो पृथ्वी प्रभावित होती है। अगर सूरज पर कुछ होता है तो पृथ्वी उसके प्रभावों से बच नहीं सकती ।अगर भविष्य में जो होने वाला है, वह न हो तो मैं नही हो सकूंगा। जब कोई व्य़क्ति अपने को अतीत और भविष्य के बीच जुड़ा हुआ पाता है तो वह ज्योतिष(Astrology) को समझ पाता है -तब यही ज्योतिष धर्म और अध्यात्म बन जाता है । हमें व्यक्ति के मानसिक तल पर काम करने की सबसे ज्यादा जरुरत है क्योंकि इसमें बदलाव करके बहुत अच्छे परिणाम मिल सकते हैं , मसलन एक व्यक्ति अपने जीवन- यापन के लिए कई काम करता है , कई बदलाव करता है लेकिन अगर उसको पता चल जाये कि उसका असली टैलेंट क्या है तो उसको सही दिशा मिल सकती है जब पैशन ही प्रोफेशन बन जाये तो आदमी का जीवन आनंदपूर्ण हो सकता है । इसलिए हमें सारभूत ज्योतिष(Astrology) को समझना और समझाना होगा और व्यर्थ की बातों से बचना भी होगा और बचाना भी होगा यही ज्योतिष(Astrology) के प्रति हमारी आदरांजलि होगी ।

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